Same-Sex Marriage पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला: भारत के लिए एक ऐतिहासिक क्षण

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Same-Sex Marriage दो व्यक्तियों के बीच का कानूनी रूप से मान्यता प्राप्त विवाह है जो समान लिंग के होते हैं।

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Same-Sex Marriage / समलैंगिक विवाह क्या है?

समलैंगिक विवाह दो व्यक्तियों के बीच का कानूनी रूप से मान्यता प्राप्त विवाह है जो समान लिंग के होते हैं। समलैंगिक विवाह के लिए कानूनी मान्यता दुनिया भर में तेजी से बढ़ रही है, और अब 29 देशों और क्षेत्रों में वैध है।

भारत में समलैंगिक विवाह का इतिहास

भारत में समलैंगिक विवाह की कानूनी मान्यता के लिए लंबी और कठिन लड़ाई लड़ी गई है। 1986 में, भारतीय सुप्रीम कोर्ट ने समलैंगिकता को अपराध घोषित करते हुए एक फैसला दिया था। इस फैसले को 2009 में एक निचली अदालत ने पलट दिया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने 2013 में इस फैसले को बरकरार रखा था।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला

6 सितंबर, 2018 को, भारतीय सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए समलैंगिक विवाह को कानूनी रूप से मान्यता देने का आदेश दिया। इस फैसले ने भारतीय दंड संहिता की धारा 377 को निरस्त कर दिया, जो समलैंगिकता को अपराध घोषित करती थी।

फैसले के प्रभाव

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का भारत में समलैंगिक समुदाय के लिए बहुत बड़ा महत्व है। यह फैसला समलैंगिक लोगों को अपने जीवन साथी के साथ विवाह करने और पारिवारिक जीवन का आनंद लेने का अधिकार प्रदान करता है। यह फैसला समलैंगिक समुदाय को सामाजिक स्वीकृति और सम्मान प्रदान करने में भी मदद करेगा।

समलैंगिक विवाह के लाभ

समलैंगिक विवाह के कई लाभ हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • समलैंगिक लोगों को अपने जीवन साथी के साथ विवाह करने और पारिवारिक जीवन का आनंद लेने का अधिकार प्रदान करना।
  • समलैंगिक समुदाय को सामाजिक स्वीकृति और सम्मान प्रदान करना।
  • समलैंगिक जोड़ों को गोद लेने और बच्चों की परवरिश करने का अधिकार प्रदान करना।
  • समलैंगिक जोड़ों को अपने साथी के साथ संपत्ति और अन्य आर्थिक लाभों को साझा करने का अधिकार प्रदान करना।
  • समलैंगिक जोड़ों को अपने साथी के साथ स्वास्थ्य बीमा और अन्य सरकारी लाभों को साझा करने का अधिकार प्रदान करना।

भारत में समलैंगिक विवाह के भविष्य

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से भारत में समलैंगिक विवाह की कानूनी मान्यता का मार्ग प्रशस्त हुआ है। हालांकि, यह देखा जाना बाकी है कि भारत सरकार इस फैसले को कैसे लागू करती है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार समलैंगिक विवाह को कानूनी रूप से मान्यता देने के लिए एक नया कानून पारित करेगी, जबकि अन्य का मानना है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ही लागू करेगी।

निष्कर्ष

सुप्रीम कोर्ट का समलैंगिक विवाह को कानूनी रूप से मान्यता देने का फैसला भारत के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है। यह फैसला समलैंगिक लोगों को उनके जीवन साथी के साथ विवाह करने और पारिवारिक जीवन का आनंद लेने का अधिकार प्रदान करता है। यह फैसला समलैंगिक समुदाय को सामाजिक स्वीकृति और सम्मान प्रदान करने में भी मदद करेगा।

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