मोदी सरकार का बड़ा फैसला किसानों के लिए दिवाली से पहले MSP में वृद्धि

Daily News 56
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msp 2024

MSP में सबसे अधिक वृद्धि मसूर के लिए 425 रुपए, सरसों 200 रुपए, गेहूं और कुसुम के लिए 150 रुपए प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी को मंजूरी दी गई है।

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मोदी सरकार ने रबी सीजन की फसलों के लिए MSP की घोषणा कर दी है। रबी फसल मार्केट में 2024-25 के लिए तैयार होंगी। उसके लिए गेहूं का दाम 2275 रुपए प्रति क्विंटल होगा और सरसों 5660 रुपए प्रति क्विंटल होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने रबी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में वृद्धि को मंजूरी दी है।

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रबी सीजन मुख्य रुप से 6 फसलों पर आधारित होती है, केन्द्र सरकार मुख्य रुप से इन 6 फसलों पर MSP निर्धारित करती हैं-

फसल का नामMSP प्रति क्विंटल
गेहूं2275 रुपए
जौ1850 रुपए
मसूर6425 रुपए
सरसों5650 रुपए
चना5440 रुपए
कुसुम5800 रुपए

न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) क्या है?

न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) वह न्यूनतम मूल्य है जिस पर सरकार किसानों से उनकी उपज खरीदती है। यह मूल्य कृषि लागत और मूल्य आयोग (CACP) द्वारा अनुशंसित लाभ मार्जिन के आधार पर तय किया जाता है। MSP का उद्देश्य किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित करना और उन्हें कृषि उत्पादन जारी रखने के लिए प्रोत्साहित करना है।

MSP भारत में क्यों महत्वपूर्ण है?

भारत एक कृषि प्रधान देश है, जहां कुल आबादी का लगभग 50% भाग कृषि पर निर्भर है। MSP भारत में किसानों की आय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य प्राप्त करने में मदद करता है और उन्हें कृषि उत्पादन जारी रखने के लिए प्रोत्साहित करता है।

MSP के लाभ

  • किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित करता है।
  • किसानों की आय में वृद्धि करता है।
  • कृषि उत्पादन बढ़ाने में मदद करता है।
  • खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करता है।
  • ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देता है।

MSP की सीमाएं

  • सभी किसानों को MSP का लाभ नहीं मिल पाता है।
  • केवल कुछ ही फसलों के लिए MSP घोषित किया जाता है।
  • MSP घोषित होने के बाद भी सरकार सभी किसानों से उनकी उपज नहीं खरीद पाती है।
  • MSP के कारण सरकारी गोदामों में अनाज का भंडारण बढ़ जाता है।
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MSP सुधार के लिए सुझाव

  • सभी किसानों को MSP का लाभ मिले यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
  • अधिक फसलों के लिए MSP घोषित किया जाना चाहिए।
  • सरकार सभी किसानों से उनकी उपज खरीदे यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
  • MSP के कारण सरकारी गोदामों में अनाज के भंडारण को कम करने के उपाय किए जाने चाहिए।

भारत में MSP का इतिहास

भारत में MSP की शुरुआत 1966-67 में गेहूं के लिए की गई थी। उसके बाद धीरे-धीरे अन्य फसलों के लिए भी MSP घोषित किया जाने लगा। वर्तमान में 23 फसलों के लिए MSP घोषित किया जाता है।

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भारत में MSP का वर्तमान परिदृश्य

भारत सरकार ने 2023-24 के लिए 23 फसलों का MSP घोषित किया है। इन फसलों में गेहूं, धान, मक्का, जौ, चना, मसूर, उड़द, तुअर, मूंगफली, सूरजमुखी, सोयाबीन, सरसों, कपास, जूट, गन्ना, तिल, रेपसीड, अलसी, नारियल, काली मिर्च, हल्दी, अदरक और छुआरा शामिल हैं।

MSP पर सरकार की नीति

भारत सरकार MSP पर अपनी नीति को समय-समय पर बदलती रहती है। वर्तमान में सरकार की नीति है कि MSP किसानों की लागत का कम से कम 1.5 गुना होना चाहिए।

MSP पर किसान संगठनों की मांग

किसान संगठनों की मांग है कि MSP किसानों की लागत का कम से कम 2 गुना होना चाहिए। इसके अलावा किसान संगठन यह भी मांग करते हैं कि सभी किसानों को MSP का लाभ मिले और सरकार सभी किसानों से उनकी उपज खरीदे।

MSP का भविष्य

MSP भारत में कृषि क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण नीति है। यह नीति किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य प्राप्त करने में मदद करती है और उन्हें कृषि उत्पादन जारी रखने के लिए प्रोत्साहित करती है। हालांकि MSP में कुछ सुधारों की आवश्यकता है, ताकि सभी किसानों को इसका लाभ मिल सके।

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